Fariyaad

मुझे अब खुद में रहने दो,


ज़मीन पर बैठी हूँ, सितारों के सपनें देखने दो,


दिलासा क्या देगा, मेरे ख़्वाहिशों को बुनियाद,


छोटे उजाले तिनके में, मेरी रौनकें ढूँढने दो...



चारों ओर दिखे बस, समंदर मुझे,


कुछ कतरा पानी का, आखों में भर लेने दो,


अगर मेरे अश्कों ने, एक पल भी हसाया होगा उसे,


आँसुओ के दरिया को, बिना थमे बहने दो...



गम इसका नहीं की, ख्वाब झूठे देखें हमने,


बिना किसी वादे के, इंतजार में मुझे रहने दो,


उम्मीद तो तब होती है, जब जिस्म से ताल्लुक हो,


दूर रहकर उसे भी, मेरी रूह का इम्तिहन लेने दो...



लफ्ज़ मेरे सारी बातें बयां नहीं करते,


मुझे अपनें सन्नाटों में चुप रहने दो,


एक दिन कफ़न में खत्म हो जाएगी मेरी जिंदगी,


दुआ रहेगी खुदा से, उसे फरियाद में सांसे लेने दो...

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