Benaam

कोशिशें, तकदीर के आगे कम पड़ गई,

मेरे दिल और दिमाग की लड़ाई सुलगा गई,

वक्त बदला, धुंधली हुई ऐसी भी परछाईयां,

समझा जिसे रिश्ता, वो केवल ताल्लुकात रह गई ...

अगर मिल जाता, एक और मौका जिंदगी से,

कुछ खामोशी और, अपने लफ्जों में घोल देते हम,

शब्दों की नाराज़गी, मन में न लाने देते,

इस दो-तरफा किस्से को, एक तरफ़ा न होने देते हम...

आबरू बचीं रहती, उस खिलते गुलाब सी भावनाओं की,

हासिल ना करते, तो उसकी खुशबू महफ़ूज रख पाते हम,

भूल गए थे, समय आनें पर, काँटे भी अपनाने होंगे,

अच्छा होता अगर, इस रिश्ते को बेनाम रहने देते हम....

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